भूमिका :
भारतीय भाषाओं में हिंदी इस राष्ट्र की एक प्रधान तथा सबसे अधिक प्रचलित भाषा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, बिहार, राजस्थान आदि राज्यों की वह मातृभाषा है, तो अन्य राज्यों में वह संपर्क भाषा के रूप में अपनाई जाती है। उसकी इसी उपयोगिता के कारण यहाँ का जन समुदाय उसे राष्ट्रभाषा के रूप में देखता है। स्वतंत्र भारत ने उसे राजभाषा के रूप में संवैधानिक दर्जा प्रदान किया है। हिंदी आरंभ से ही जहाँ संपर्क भाषा के रूप में प्रथम स्थान पाती रही है वही धर्म, साहित्य, संस्कृति तथा सामाजिक मूल्यों की संवाहिका बनी है। राजनीतिक क्षेत्र में भी वह प्रत्येक युग में अपनी व्यापक संपर्क क्षमता के कारण अनायास ही गौरवपूर्ण स्थान पाती रही है । आज साहित्य के साथ-साथ हिंदी में अन्य क्षेत्रों की सामग्री भी विपुल मात्रा में उपलब्ध है। विज्ञान, तंत्रज्ञान, अंतरिक्ष तथा वर्तमान युग के सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का ज्ञानभंडार भी उसमें पाया जाता है। संक्षेप में समाज एवं राष्ट्र की उचित मांग को पूरा करने की क्षमता हिंदी में है। राष्ट्र की एकता, अखंडता तथा राष्ट्रीय भावनाओं की संवाहिका के रूप में भी वह निरंतर पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ अपना दायित्व निभा रही है। आज देश के लगभग प्रत्येक विश्वविद्यालय में हिंदी भाषा एवं साहित्य में अध्ययन-अध्यापन तथा अनुसंधान की सुविधाएँ उपलब्ध है। इतना ही नहीं तो विश्व विकसित, विकासशील तथा महासत्ता कहे जाने वाले देशों के विश्वविद्यालयों में भी हिंदी भाषा स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर विदेश भाषा के रूप में पढ़ाई जा रही है।
जे.ई.एस.महाविद्यालय की स्थापना के साथ ही सन 1958 से हिंदी विभाग की स्थापना हुई । वरिष्ठ महाविद्यालय में बी.ए. स्तर पर ऐच्छिक रूप में तथा बी.ए., बी.कॉम एवं बी.एस्सी. के स्तर पर द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी का अध्यापन किया जा रहा है। हिंदी विभाग को अनुसंधान केंद्र का दर्जा भी प्राप्त है। वर्तमान में महाविद्यालय के अध्यापकों के साथ-साथ अन्य महाविद्यालयों के शोध निर्देशक भी इस अनुसंधान केंद्र से संलग्न है। स्नातक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम भी विभाग की ओर से चलाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन तथा विविध शोध परियोजनाएँ भी विभाग की ओर से सक्रिय रूप से चलाई जा रही है।
दृष्टि (Vision) :
महाविद्यालय में प्रवेशित विद्यार्थियों का चतुर्दिक विकास साहित्य के माध्यम से करते हुए भाषिक कौशल से उन्हें परिपूर्ण बनाना।
लक्ष्य (Mission) :
विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों को केंद्र में रखते हुए भाषिक अनुप्रयोगों की व्यवहारिक उपयोगिता के प्रति छात्रों को सजग बनाना तथा नैतिक माननीय संस्कारों से परिपूर्ण पीढ़ी का निर्माण करना।
उद्देश्य (Objective) :
हिंदी की व्यवहारिक उपयोगिता का ज्ञान छात्रों तक पहुँचाना।
नई तकनीक के प्रयोग से प्राप्त रोजगार के अवसरों का ज्ञान कराना।
वैश्वीकरण तथा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बढ़ते हिंदी के महत्व की ओर विद्यार्थियों को आकर्षित करना तथा इन क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की जानकारी देना।
विषय की व्याप्ति (Scope of the Subject) :
वैश्वीकरण के कारण संपूर्ण विश्व ग्राम के रूप में परिवर्तित हो गया है। भारत की जनसंख्या को देखते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत की ओर आकर्षित हो गई है। यहाँ उद्योग तथा सेवा क्षेत्रों में अपने कदम बढ़ाने के लिए इस देश की प्रधान संपर्क भाषा हिंदी को स्वीकारना, अपनाना उन्हें अनिवार्य बन गया। आज निजी क्षेत्रों में हिंदी जानने वालों की माँग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। भाषा कौशल को अवगत करने वाले युवाओं की काफी माँग इन क्षेत्रों में है। अनुवाद के क्षेत्र में युवाओं को अच्छे अवसर प्राप्त हो रहे हैं। भारत बहुभाषिक देश होने के कारण आरंभ से ही अनुवाद यहाँ की अनिवार्य आवश्यकता बना हुआ है। आज विश्व संवाद का प्रभावी माध्यम अनुवाद है। इसलिए युवाओं को इस क्षेत्र में काफी रोजगार उपलब्ध हो रहे हैं । स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को पूरा कर छात्र सरकारी तथा निजी क्षेत्रों में अपना सफल भविष्य बना सकते हैं।
